कभी कभी लगता है की दिन को बेचकर
कुछ पल अपनें लिये खरीद लें,
कुछ बूनें हुए सपनों की कस्ति को ले कर अपनां आसमां बना लें,
बादलों की लकीर पर कुछ ख्वाबो की सूराही भर दे,
आहिस्ता आहिस्ता ख्वा़बो की डिब्बी को खोल दें,
कभी कभी लगता है कि दिन को बेचकर कुछ पल अपनें लिये खरीद लें|
हेमांगी-
26 SEP 2021 AT 17:01