कभी कभी लगता है कि एक युध्ध बाहर चल रहा है और एक मेरे भीतर,
बहोत से सवालो के बादलो में दिल,दिमाग फंसता जा रहा है,
कुछ सवाल बवंड़र से लगते है,
कभी ज़हेन में खयाल आता है की ये सवाल अगर होठों की दहेलिज़ को पार करके सबके सामनें आ गये तो!
क्या होगा उन सवालो की पाकीज़गी का!
क्या सच में वे सवाल, ख्याल पाक है!
अगर वो पाक है तो फिर नापाक क्या है!
हेमांगी-
22 JAN 2022 AT 0:40