कौन कहता है यादें पन्नों में सिमट कर कैद हो जाती है!
कभी कभी खूशबू बनकर फिझा मैं फेल कर उस वक्त मे ले जाती है,
जहां आज भी वो लम्हां वक्त की कैद मे तिलमिला रहा है.
हेमांगी-
23 JUL 2020 AT 14:47
कौन कहता है यादें पन्नों में सिमट कर कैद हो जाती है!
कभी कभी खूशबू बनकर फिझा मैं फेल कर उस वक्त मे ले जाती है,
जहां आज भी वो लम्हां वक्त की कैद मे तिलमिला रहा है.
हेमांगी-