16 JUL 2020 AT 9:06

जो रुके हुए अश्क है आंखों की पलकों पे उन्हें बह जाने दो बारिश की बूंदों के संग,
बारिश जो सुखी ज़मीं को ठंडा करदेती है,
ये अश्क भी दिल की ज़मी को ठंडा कर देंगे.
हेमांगी

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