जिससे अब तक मिले नहीं.
जिससे अब तक मिले नहीं,
उसीसे क्यों बढ रही है नजदीकी,
बार बार उसी के ख्यालों मे डुबा रहे ये दिल,
कुछ आहट पर मुस्कुराने लगे ये दिल,
अन्जानी सी बैचेनी लगें मन में,
धूंधली धूंधली तस्वीर बने मन में,
ना रातों में निंद मिले,
ना मिले दिन मे सुकून,
हर घडी इन्तज़ार रहे उस का,
जिससे अब तक मिले नहीं हम रुबरू.
हेमांगी-
18 JUL 2020 AT 7:41