जि़ंन्दगी के उस मोड़ पर कभी हम मिले ,
तो सवालो की बारीश में मै तुम्हे भीगाउँगी नही,
तुम दिल के पन्नों पर सजे शब्द से थे,
पर पता नहीं कौन सी शाही से अपनें इश़्क की कहांनी लिखी गई थी,
जो उस पन्नें पर से सब सूख सा गया,
तु भी और तेरा इश़्क भी ,
शायद विश्वास का जो कागज़ था,
उस के पन्नों पर कोई दाग सा लग गया था,
और वक्त भी भारी भारी साँस छोड़ रहा था,
और तेरे कधों पर इश़्क अब बोज़ सा लगनें लगा था,
शायद सूखनें लगा था.
हेमांगी-
19 DEC 2021 AT 16:22