जहाँ ख़्वाब उतरते है.
जहाँ ख़्वाब उतरते है वो मेरी आँखो का आँगन है,
अकसर वहां तुम मिलनें आया करो,
मैं ने वहां ना कोई दरवज्जा लगाया है ना कोई परदां,
तुम्हारे लिये हरदम मेरी आँखो का आँगन महेका रहेता है,
कुछ तेरे एहसास से तो कुछ तेरे ख्वाब से,
ना कोई वहां रोकटोक है ना ही कोई गीला,
फिर क्युं तुम आना भूल जाते हो!
या मुजे ही भूल गये हो!.
हेमांगी-
8 NOV 2021 AT 21:29