इश्क़ की कुछ कहांनियाँ.
कहांनियाँ बहुत सी होती है जिंदगी में,
कुछ पूरी तो कुछ अधूरी,
ओर कुछ अधूरी हो कर भी कहीं पूरी हूई.
एक कहांनि अपने इश्क़ की भी थी,
हसीन ख्वाब था,
जब तु मेरे पास था,
परिंदों सी मे उडती ,मचलती,
मेरे ख्वाबो के तुम पंख थे,
तेरे हर अलफाज की में गहराई थी,
तु मेरा वो चांद था ,
जो मेरी जिंदगी के आंगन में बसा रहता था,
वक्त बदला, हवा ने अपना रुख बदला,
किसी अपने की ही नज़र में आ गया अपनां इश्क़,
जो एक दूसरे की नज़र से ही मिट गया ये इश्क़.
हेमांगी
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11 AUG 2020 AT 7:40