इंसान सोचता है.
सोचना जरूरी है,
पर सोची हुई बात पर मंथन करना कभी कभी आवश्यक हो जाता है,
लेकिन आज का इंसान सोचता बहुत है,
पर मंथन नहीं कर पाता,
वो हर बार अपने आप को औरों से बेहतर बताने की कोशिश में कुदरत को आहत करता है,
अपने आप को, अपनों को हानि पहोचाता है,
आजके इंसान ने सब कुछ सिख लिया ,सब कुछ बना भी दिया,
बस ऐक बात सोचना समजना भूल गया,
और बनना भी भूल गया,
वो है "इंसान" बनना.
हेमांगी-
7 JUN 2020 AT 23:26