इन्सान भी ना अजीब हैदूर रहे रिश्तो में अपनापन ढूंढता हैजो पास है उन्हीं से नजरे चुराता हैहेमांगी -
इन्सान भी ना अजीब हैदूर रहे रिश्तो में अपनापन ढूंढता हैजो पास है उन्हीं से नजरे चुराता हैहेमांगी
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