गुंजाइश तो रहेती है.
गुंजाइश तो रहेती है उस आधे अधूरे रहे रिश्ते की,
जो कहीं वक्त की चक्की मे पीसकर रह गया है.
गुंजाइश तो रहेती है उस पीछे छूट गए खवाब की,
जो रिश्तों के चक्रव्यूह में फंसकर कहीं खो गया है.
गुंजाइश तो रहेती है उस हर एक बात की,
जो अपनों को संभालते संभालते कहीं खो जाती है.
गुंजाइश तो रहेती है अपने आप से मिलने की,
जो अपनों की खवाहिशे पूरी करने में कहीं खो गई.
हेमांगी-
13 JUN 2020 AT 16:42