7 AUG 2021 AT 16:59

एक शाम ,
दरवज्जे पर टूक टूकी लगाये कोई खड़ा था,
शायद किसी का इन्ज़ार था,
कोई वादा या कोई कसम थी,
पर शायद वादा और कसम कोई भूल गया था,
या फिर शायद इरादा ही बदल दिया था,
पर दिल के कोने में से एक आवाज़ आई,
उसे अपनें यार पर यकीन था,
या फिर शायद यार का दिल उसके पास था,
वो तिलमिला रहा था,
वक्त दौड़ रहा था,
दिन बिते,साल बिते,
उन निगाहों का धर भी अब शायद वो दरवज्जा ही है,
आज भी उस दिल को यकीन है,
वो भूला हूवा वादा निभाने कोई आयेगा.
हेमांगी

-