एक औरत जब ब्याहती है,
तब वो सिर्फ किसी एक इंन्सान से ही नही ब्याहती,
जाने अन्जाने से वो उस परिवार की सोच से,परिवार से,उस परिवार के रिती रिवाजो से भी ब्याही जाती है,
वो अपनें पीछे सिर्फ अपनें परिवार को ही नही,
पर कभी कभी अपनीं सोच को,मुस्कान को,मासुमीयत को,अल्लड़पन को,
और शायद अपनें अंदर रहे बच्चे को भी छो़ड आती है,
कभी लगता हे ये शादीयां शायद औरत इमित्हान पत्र है,
उसे रोज़ इसे देना है,
बिना किसी विरोध के.
हेमांगी— % &-
20 FEB 2022 AT 9:18