चुपचाप से गुज़र जाना.
वो चाए का कुल्लड,
वो टेबल पर जमा हुआ तेरी चाए का दाग,
वो आधा अधूरा सुना हुआ गाना,
आज भी तेरे आने के इन्तज़ार मे बैठे है.
वो आधी रही अपनी बात वो मुलाकात,
चीख चीख कर पुछे मुझे वो हजार सवाल,
कौन सी भूल हूई थी,
या कौन सा ख्वाब तोडा था,
जो तुने मुझे आधें रास्तें में ही छोडा था.
अगर में मर भी जाऊं,
तो एक बार मेरे पास तो आना,
पास बैठ हर वो गुनाह बताना,
चुपचाप से गुज़र मत जाना,
ना मे बोल सकूंगी, ना हाथ थाम सकूंगी,
मेरे जिस्म में कैद मेरी रूह को,
आखरी बार आजाद कर जाना.
हेमांगी-
5 AUG 2020 AT 15:08