12 JUL 2020 AT 23:00

चांद जब करीब था.
मेरी खिडकी से चढकर जब वो मेरी छत पर आता है,
यकीनन चांद मुझे मेरा महबूब लगता है.

उसकी रोशनी जब अंधेरे को चुमती है,
हजारों नाकामियों को नइ आश मिलती है.

आहिस्ता आहिस्ता जब वो मुझे बादलों की आड़ से देखता है,
सहसा मुझे लगता है की जेसे मुझे अपने आप में समाता है.

चांद जब मेरे करीब आता है,
तब तेरा मेरे इर्द गिर्द होनेका अहसास होता है.
हेमांगी

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