बिछड़ते हुए लम्हो के नाम.
ओ सुन नां बिछड़ते हुए लम्हो आज सोचा एक खत तेरे नाम भी कर दूं,
बहोत सोचा क्यां लिखूं!
तु जब मेरी जिंदगी में आये थे नां!तब सबकुछ सही और बढीयां लग रहां था!
फिर धीरे घीरे तुम भी बदलनें लगे,
अपनों से नज़रे चुरानें लगे,
अपनों को दूर करके परायो को अपनां बनाया,
जब तुम जाने लगे तब कुछ टूटा था मुझ में,
बस में बाहर सें खूश ,बेपरवाह खूदको मान रही थी,
पर हकीकत कुछ ओर ही थी,
सांस फूल रही थी,
जी तो रही थी,पर जान कहीं ओर रुक सी गई थी,.
हेमांगी-
3 JUL 2021 AT 14:48