बहोत से सवाल है,
पर उसका कोई जवाब नहीं,
बहोत सी बाते है,
उसका कोई वजूद नही,
कई बार ये अच्छे संस्कार बबाल करते है,
बेवज्ह ही मन को परेशान करते है,
हर बार सर्वगुण संपन्न नारी ही क्यूं?
क्युं कोई नर नही,
सवालो के बवंड़र मे फसे हुए मन,
संस्कारो की दहेलिज पर खडे सवाल,
मन में मचाये भूचाल,
फिर भी बहोत से सवाल है,
पर उसका कोई जवाब नही.
हेमांगी-
11 JAN 2022 AT 21:56