7 APR 2022 AT 22:50

बचपन से कुछ सवालो के जवाब मिले ही नहीं,
ना ही वो किताबो की आगोश में थे,
ना ही किसी ग्रंथ की गहेराइ में,
वो केवल सोच तक ही सिमित रहेते थे,
खूलकर हंसना उसे भी पसंद है,
पर वो सिर्फ मुसकुरा ही सकती है,
उसे भी कभी कभी चिखना चिल्लाने का मन होता है,
गुस्सा भी आता है,
कुछ बेमतलब की बातो पर सवाल करना चाहती है,
उसे भी पसंद है उड़ना ,
पर अपने आसमान में,
अपनें दोस्तो के साथ धूमनां,फिरनां, ठहाके लेकर हंसना,
पर ये वो नहीं कर सकती,
क्यूंकी वो औरत है,
उसे ये सब शोभा नहीं देता,
बचपन से ये सब सूनकर ही तो एक लड़की छोटी उम्र में ही औरत बन जाती है,
कुछ ख्वाहिशे बस ख्वाहिशे ही होती है,
और कुछ सवाल बिना किसी जवाब के,
यहां वहां पनपते रहेते.
हेमांगी

-