2 MAR 2022 AT 21:06

अतीत की परछाईयाँ.
बहोत संभलकर चलते है,
बिना किसी बात के मन ही मन में जलते है,
दिल में दफन की हूई हर एक याद को दिन के उजालों में सूला देते है,
पर जब ये रात आती है ना,
न जाने क्यूं मन उदास सा हो जाता है,
हर रोज दिल के आँगन में अमावस का चांद निकलता है,
अतीत की परछाईयाँ,खामोशियाँ,तन्हाईयाँ और तन्हां कर जाती है,
ये अतीत की परछाईयाँ हर दम साथ चलती है.
हेमांगी

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