अपनी मर्जी के मुताबिक.
अपनी मर्जी के मुताबिक कोन जीता है यहां?
यहां तो ख्वाब देखने पर भी बंदिशें लगाइ जाती है.
कुछ सुलगते अरमानो की राख पर,
ओरों के ख्वाहिशों के दिये जलाने पडते है.
जीते है यहां इन्सान ओरों की नजरों में अच्छा लगने के लिए,
कभी कभी खूद की नज़रों में गिरना शिख लेते है.
इश्क़ को इश्क़ से नहीं,
पर कभी कभी सबूतों से जताना पडता है.
अपनी मर्जी के मुताबिक कोन जीता है यहां?
यहां तो ख्बाब देखने पर भी बंदिशें लगाइ जाती है.
हेमांगी
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27 JUL 2020 AT 7:32