अपनी जगह पर.
बेवजह यहां वहां क्यूँ दौडे जाते हो,
दिल में तसल्ली के फूल कयों नहीं सजाते हो,!
माना की ओरों के मुकाबले तुम पर ज्यादा जिम्मेदारीयां हे अपनों की,
फिर क्यों ओरों की बातो से तिलमिलाते हो अपनों पर!
ठंड रखो,इतमीनान से बेठो ओर औरों को भी बेठने दो,
अपनी जगह पर रह कर अपने रिश्तों को वक्त दो.
हेमांगी
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11 JUN 2020 AT 17:48