अनगिनत इच्छाएं मन की.
अनगिनत इच्छाएं मन की ,
दिल के केनवास पर कुछ आकार बना रही है,
कुछ उभरती है, कुछ मिट सी रही है,
तेरा चहेरा तो मेरे ज़हन में छिप सा गया है,
तुजे बार बार देख ने, सोच ने पर मन थोड़ा हिचकिचा सा रहा है,
वो साथ जीने की ,चलने की, इच्छाएं सीने मे जवाला दे रही थी,
वो अब मन के कीसी कोनें मे सिकुड़ सी गई है,
अनगिनत इच्छाएं मन की पंखफैलाएं उड रही है.
हेमांगी
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12 AUG 2020 AT 19:22