अमृता तुम.
कुछ इश़्क की कहांनियां अमृता सी ,
बेपरवां,बिंदास,अल्लड़
फिर भी दिल में दबी दबी सी
ना साहिल की तरह साहिर मिला,
ना इमरोज़ से दूर रेह पाई,
कुछ इश़्क की कहांनियां अमृता सी,
जब वो अल्फाज़ को पन्नें पर सूलाती,
सच मानों कहीं दिलो के राज़ खोल देती,
लगे जेसे दिल निकालकर रख्खा हो जेसे,
हेमांगी-
2 SEP 2021 AT 18:49