ऐक वही था.
जब जब बंधा गया मुझे इन खोखले रिश्तों की जंजीरों से,
ऐक वही था जिसनें संभाला मेरे वजूद को प्यार से.
हर बार मेरी रुह को तोडा गया बेमतलब की बातों से,
ऐक वही था जिसनें मरहम लगाया अपने अलफाजों से.
सपनों की उडान को बिच मे ही काटा गया छल औंर फरेब से,
ऐक वही था जिसनें फिर से सपने दिखाऐ अपने मन की शक्ति से.
हेमांगी
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19 JUN 2020 AT 13:51