ऐ अधूरेपन.
ऐ अधूरेपन तेरा अहसास भी रातों की नींद उडा ले जाता है,
कभी कभी कुछ बातें, अहसास, अधूरी होंकर भी अपने आप मे पूर्ण है,
तो कुछ बातें पूर्ण हो कर भी अधूरी!
ऐ अधूरेपन तु तो दिल ओर दिमाग के कोने में छिप कर बेठा वो बदमाश है,
जो इन्सान को कभी हंसने ही नहीं देते!
उसकीं सोच का दायरा सिमट लेते हो,
ओ अधूरेपन कभी कभी इन्सान को तेरे अधूरेपन के ख्याल से मुक्ति दे कर जी लेने दो.
हेमांगी-
16 JUL 2020 AT 8:30