ऐ आईने.
ऐ आईने तु क्यों इतना इतरा रहा है!
ये तु नहीं मेरा साया तुजे लिपट रहा है,
कभी तु हसता है,
ओर कभी कभी हसते हसते रो देता है,
तु सच्चा तो बहुत है,
पर इतना ही जालिम,
खूबसूरती के माईने तेरे इर्द गिर्द घूमते रहते है,
पर मन की खूबसूरती आंखों से छलकती है,
तुजसे इश्क बेहद करते है,
क्योंकि अकेले में तेरे अंदर किसी ओर की छबि देख लेते है.
हेमांगी-
9 JUL 2020 AT 21:55