आंखों से ओझल रहता है
तु बेशक आंखों से ओझल रहता है,
पर दिल के कोने में छुपा छुपा सा रहता है,
तु एकांत सी रातों का वो हमसफ़र है,
जो सन्नाटे सी रातों मे मेरे अंदर शोर मचाते रहता है,
लिपट जाती हूँ तेरी यादों की सेज से,
तकीये के नीचे तु छीपा छीपा सा मिलता है,
तु बेशक आंखों से ओझल रहता है,
पर दिल के कोने मे छुपा छुपा सा रहता है.
हेमांगी-
2 JUN 2020 AT 22:30