29 JAN 2022 AT 15:38

आखरी मुलाकात.
आज हवाओ में कुछ नमी सी थी,
आज एक वक्त के बाद उनसे मुलाकात होनी थी,
मन में प्यास थी ,मिलनें की आश कुछ खास थी,
पर न जाने क्युं ड़र नें भी अपनां मुंह खोला था,
दिल के एक हिस्से को आज न जाने क्युं कुछ खोना था,
मुलाकात भी कुछ युं हूई,
मुंह से कोई बात ना हूई पर आँखे हज़ार सवाल कर गई,
एक वक्त ऐसा था,
जिसके पास बातो का खजाना हुआ करता था,
आज वो अल्फ़ाज का मोहताज़ बन गया था,
आँखो को आँखो से चुराकर कुछ छिपा रहा था,
पहेले जो वक्त कम पडता था,
आज चंद मिनट़ो तक बात नही कर पा रहे थे,
मन के भीतर के इश़्क को कहीं खो आये थे,
मिलनें का वादा करके जूदा तो हो रहे थे,
पर अब से उनकें रास्ते भी एक दूसरे से कट़ से रहे थे,
चाय पे शूरु हूई कहानीं आज चाय पर ही खत्म हो रही थी,
अगली बार मिलनें की मुलाकात आज आखरि बार की मुलाकात हो रही थी.
हेमांगी— % &

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