23 APR 2022 AT 16:49

आज "वो" चहेरा बरसो के बाद देखा,
कुछ खास तो बदला नहीं था उस चहेरे में,
बस निगांहे एक हुन्नर सिख गई थी उसकी,
नज़रो को चुराना,
कभी सोचा नहीं था की मेरा चहेरा उन निगाहों को अब राज नहीं आयेगा,
जो कभी एक वक्त पर उस चहेरे को देखनें के लिए घंटो तक घूप में गुलाबी हूआ करता था,
वो अब कुछ इस तरह अजनबी बन चुके थे,
जैसे कभी मिले ही न हो!
हेमांगी

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