Gourav Dev Goswami   (GôùřâV)
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Joined 12 April 2019


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Joined 12 April 2019
9 MAY AT 17:51

तुझसे जुदा हूँ मैं सिर्फ़ तेरी ज़िद के लिए
कोई उम्मीद भी नहीं अब तुझसे दीद के लिए

रूठे चांद का इंतज़ार अक्सर फज़ूल है गौरव,
क्यों सिलवाऊं मैं आखिर कुर्ते ईद के लिए

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8 MAY AT 3:02

गैर के कमरे में जो तू बिता रही है शाम आज कल
मैं भी काट रहा हूँ रातें रख के पास जाम आज कल

एक दौर था हर दुआ में जब तू शामिल हुआ करती थी,
कसम से बहुत घिन आती है सुनके तेरा नाम आज कल

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4 MAY AT 12:07

ख़ुदा जाने क्या भाव है मेरा इश्क़ के बाज़ार में
इम्तेहान भी कम नहीं है जान तुम्हारे प्यार में

ख़ामोशी से ही सही तुम बस दीदार देती रहना,
और मैं भी लिखता रहूंगा हमेशा तुम्हारे इंतेज़ार में

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16 APR AT 17:30

हैरानी होती है, कैसे धरती का दुःख आसमान नहीं समझता
नसीहत और नदामत के अलावा कुछ भी ये जहान नहीं समझता

मुब्तला-ए-इश्क़ हो भी रहे हो तो उसके लिए तुम गौरव,
कमबख्त कभी भी तुमको जो इंसान, इंसान नहीं समझता

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11 APR AT 1:40

शायद तुझसे दिल लगाना सही नहीं था
मैं जहां रहना चाहता था, वहीं नहीं था

मुआयना किया तो सब थे तेरे दिल मे
बस जब ख़ुद को ढूंडा तो कहीं नहीं था

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7 APR AT 16:06

दफ़्तर में बिताने को दिन और सोने के लिए रात नहीं है
मैं तुम्हारी बात करूं, तुम में ऐसी भी बात नहीं है

अक्सर वो लोग आसमान को गाली दिया करते हैं,
जिन बिचारों के पास उड़ने की औकात नहीं है

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30 MAR AT 22:32

लफ्ज़-ए-तंज़ कम नहीं झेले थे
घरसे निकलने को मजबूर हुआ था

हुज़ूर बनने के ख़्वाब थे मेरे
हुज़ूर बनने को मज़दूर हुआ था

आस खुदा ओर भरोसे से मेरा
उस दिन भरोसा चूर चूर हुआ था

ज़हन में माँ और जेब भी खाली
बेबसी का पहाड़ दस्तूर हुआ था

रिश्तों के दौलत फज़ूल थे सब
एक शोहरत का बस फ़ितूर हुआ था

वैसे मैंने कोई जंग नहीं जीता
पर किस्मत को हरा के ग़ुरूर हुआ था

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17 MAR AT 23:14

जुए में घर खोता है, कोई इश्क़ में जान खो देता है
सुकून भी उसीका टूटता है सबको सुकून जो देता है

उसका गुस्सा देख के उसको तन्हा छोड़ मत देना,
प्यार से पुकारने पर अक्सर रूठने वाला रो देता है

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12 MAR AT 0:48

हमारे दरमियान अगर हया यूँ गुमनाम होजाएगी
ख़ुद को रोकने की ये कोशिशें नाक़ाम होजाएगी

भवरे को गर एक बार शहद की लत लग गयी,
मेरी जान, खामखा जवानी बदनाम होजाएगी

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8 MAR AT 2:02

तुम आखिर इतना गुस्सा क्यों करते हो
करते भी हो तो हमेशा क्यों करते हो

हमे धोखा देने का मौका तो दो गौरव,
सिर्फ खुद पे ही भरोसा क्यों करते हो

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