Gautam Kothari sanatni   (Gautam kothari Sanatni)
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Joined 8 December 2018


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Joined 8 December 2018
Gautam Kothari sanatni 13 AUG AT 23:01

स्वप्न सलोना टूट भी जाये मत होना भयभीत
मन के हारे हार है और मन के जीते जीत

सुख दुख भूल कर सारे अपने एक ही धुन रहती है
जन्मदायिनी माता भी तो कितनी पीडा सहती है
माँ के मन की माँ ही जाने क्या ममता क्या प्रीत
नही चाहिये कोख का अंकुर धरती कब ये कहती है

बिना भावना सृजन ना होता ना होती है प्रीत
मन के हारे हार है और मन के जीते जीत

एक बाँस मे सजे भावना बंसी बन संगीत बिखरते
एक तूलिका करे कामना मनभावन से चित्र उभरते
मिल जाते भाअर्थ कभी तो शब्द कविता मे ढलते हैं
एक शिल्पी जब करे साधना पत्थर में भगवान उतरते

बिना साधना कला ना होती ना होता संगीत
मन के हारे हार है और मन के जीते जीत

ऐसा कौन सिकन्दर है जो बिन हारे ही जीत गया हो
ऐसा कौन धुरन्धर है जो बिन गलती के सीख गया हो
माँ के गर्भ से सीख के कोई दुनिया में कब आता है
ऐसा कोई वक्त नही , जो बिना चुनौती बीत गया हो

एक परीक्षा हर पल जीवन नही किसी से मीत
मन के हारे हार है और मन के जीते जीत

जीवन में हर भोर से पहले काली रातें आती हैं
धरती गर्मी से तपती तब, गगन में बदली छाती हैं
हर उपलब्धि की राहों में धूप भी होगी शूल भी होंगे
पाँव मे छाले जिनके रिसते मंजिल गले लगाती है

सतत प्रयास ही सही नीति है अग्निपथ ही रीत
मन के हारे हार है और मन के जीते जीत
- संजीव जैन

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Gautam Kothari sanatni 13 AUG AT 22:44

मन के हारे हार सदा रे!!!
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मन के हारे हार सदा रे, मन के जीते जीत,
मत निराश हो यों, तू उठ, ओ मेरे मन के मीत!

माना पथिक अकेला तू, पथ भी तेरा अनजान,
और जिन्दगी भर चलना इस तरह नहीं आसान।
पर चलने वालों को इसकी नहीं तनिक परवाह,
बन जाती है साथी उनकी स्वयं अपरिचित राह।

दिशा दिशा बनती अनुकूल, भले कितनी विपरबीत।
मन के हारे हार सदा रे, मन के जीते जीत॥1॥

तोड़ पर्वतों को, चट्टानों को सरिता की धार
बहती मैदानों में, करती धरती का शृंगार।
रुकती पल भर भी न, विफल बाँधों के हुए प्रयास,
क्योंकि स्वयं पथ निर्मित करने का उसमें विश्वास।

लहर लहर से उठता हर क्षण जीवन का संगीत
मन के हारे हार सदा रे, मन के जीते जीत॥2॥

समझा जिनको शूल वही हैं तेरे पथ के फूल,
और फूल जिनको समझा तूवे ही पथ के शूल।
क्योंकि शूल पर पड़ते ही पग बढ़ता स्वयं तुरंत,
किंतु फूल को देख पथिक का रुक जाता है पंथ।

इसी भाँति उलटी-सी है कुछ इस दुनिया की रीति।
मन के हारे हार सदा रे, मन के जीते जीत॥3॥

- द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

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Gautam Kothari sanatni 13 AUG AT 22:37

रोशनी अंधेरा ओढ़े खड़ी है।
उम्मीदे जमीन पर पड़ी है।।

कदम पीछे की और पड़ रहे है।
भयानक साये आगे बढ़ रहे है।।

काल के पंजो में परिंदा फसा है।
उड़ने की आस पर पंख बंधे है।।

काल के हाथों ये दम तोड़ जाएगा।
मन से हारा हुआ जान कैसे बचाएगा।।

तन से हारा तो फिर भी उठ जाएगा।
मन से हारा खुद से ही मात खायेगा।।

अलविदा यारो..😢😢😢

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Gautam Kothari sanatni 13 AUG AT 21:31

आज से ये मंच छोड़ रहा हु।
कल शायद ये जहाँ भी छोड़ दु।
बहुत मीठी यादे थी, बहुत प्यारा रिश्ता था,
जीवन रहेगा तब तक जहन में यादे ताजा रहेगी
अलविदा दोस्तो!!!🙏🙏🙏🙏🙏

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Gautam Kothari sanatni 10 AUG AT 22:17

*जीवन मे अगर कोई सबसे*
*सही रास्ता दिखाने वाला मित्र है*
*तो वो है "अनुभव"*

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*जीवन मे अगर कोई सबसे सही रास्ता दिखाने वाला मित्र है*

*तो वो है "अनुभव"*

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लोग बहोत
ही अच्छे होते है
अगर हमारा वक़्त अच्छा हो तो...

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लोग बहोत
ही अच्छे होते है
अगर हमारा वक़्त अच्छा हो तो...

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Gautam Kothari sanatni 6 AUG AT 20:49

दो विधान दो प्रधान दो निशान
का कालिख समा 370 और 35 A
को कश्मीर से नाबूद करने के लिए
ग्रेट प्रधान सेवक नरेन्द्र मोदीजी का आभार
आज मुजे मेरे मत का फल मिल गया..!!
सचमे “ मोदी है तो मुमकिन है ”
🚩🚩जयतुहिन्दुराष्ट्रम🚩🚩



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Gautam Kothari sanatni 6 AUG AT 20:32

विचार बिना का कार्य,
नियम से संकट लाता है।

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विचार बिना का कार्य,नियम से संकट लाता है।

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Gautam Kothari sanatni 6 AUG AT 20:30

〰🌺🍂🌸🌿🌹सुभाषित🌹🌿🌸🍂🌺〰

श्रिय: प्रसूते विपद: रुणद्धि,
यशांसि दुग्धे मलिनं प्रमार्ष्टि ।
संस्कार सौधेन परं पुनीते,
शुद्धा हि बुद्धि: किलकामधेनु: ॥

शुद्ध बुद्धि निश्चय ही कामधेनु जैसी है क्योंकि वह धन-धान्य पैदा करती है; आने वाली आफतों से बचाती है; यश और कीर्ति रूपी दूध से मलिनता को धो डालती है; और दूसरों को अपने पवित्र संस्कारों से पवित्र करती है। इस तरह विद्या सभी गुणों से परिपूर्ण है।

🌹🌸शुभ प्रभातम।।🌸🌺

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Gautam Kothari sanatni 6 AUG AT 20:27

अधिकारों का दुरुपयोग आपको
महान नहीं,शैतान बना देगा।

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अधिकारों का दुरुपयोग आपको
महान नहीं,शैतान बना देगा।

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