Dr. Rajdeep Deshmukh  
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Joined 13 September 2018


Joined 13 September 2018

धन्यवादाचे वाद कशाला,
आभाराचे भार कशाला,
आपलीच लोकं आपली मदत
करतात, आपणही त्यांना धन्यवाद
म्हणून वाद निर्माण करू नये.
एकमेका सहाय्य करू अवघे
धरू सुपंथ.

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Dr. Rajdeep Deshmukh 28 MAY AT 20:51

कोव्हिड 19
2000 साल के एक मानसिक रोगी
को "बिस" साल बाद
अस्पताल से छुट्टी दे दि गयी
"जो बार बार हाथ धोता था".

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Dr. Rajdeep Deshmukh 27 MAY AT 21:57

जी "यमा" पासून वाचवून आपल्याला या
जगात आणते ती "माय",
जो आपल्यासाठी दिवस रात्र राब राब
राबतो तो "बाप".
आई आणि बाप आपल्या मुलांसाठी
आधारवड असतात आणि त्यांची मुलं वटवृक्ष व्हावीत म्हणून धडपड करत असतात.
आई आणि वडिलांना कोटी कोटी प्रणाम.🙏🙏🙏🙏

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Dr. Rajdeep Deshmukh 6 MAY AT 22:49

History teaches a lesson that if you did not respect women then your end is very near.
Women's respect leads to prosperity and development of the universe and
disrespect or insult of women leads to destruction of universe.

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Dr. Rajdeep Deshmukh 28 APR AT 23:56

जगातील ज्या ज्या सुंदर वस्तू आहेत
त्या मागे एक भयानक वास्तव दडलेलं आहे.
इतिहास त्या गोष्टींचा साक्षीदार आहे.
काही ऐतिहासिक गोष्टींचा उलगडा झाला आहे
तर काही गोष्टींचा उलगडा एका गूढ रहस्यामध्ये
रूपांतरित झाला आहे.
एक गोष्ट मात्र नक्की इतिहास हा अशा गोष्टींचा
मोठा पहाडच आहे,
ज्या खाली गूढ रहस्य अस्तित्व करते.

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#इतिहासातील गूढ #भयानक वास्तव

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Dr. Rajdeep Deshmukh 18 APR AT 12:06

आजकल ऐसा दौर है,
जो घर मे बैठा वही शेर है,
जो बाहर निकला वो वही ढेर है,
ये दुनिया का अलग हि फेर है,
कलयुग का जो खेल है,
जिस को समझ आया वो हि होशियार है,
वरना मृत्यू होने मे क्या देर है,
बाहर कोरोना का शोर है।

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#कोरोना का शोर #कलयुग का दौर #

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Dr. Rajdeep Deshmukh 31 MAR AT 18:46

सुनसान सडके बुलाती है पर जाने का नही,
पोलीस का लाठीचार्ज खाने का नही।
कोरोना को सताने का नही,
घर बैठ के हटाने का है।
कोरोना के बारे मे जनजागृती फैलानी है,
उस को इस दुनिया से उठाने का है।

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Dr. Rajdeep Deshmukh 28 MAR AT 10:09

मनुष्य आज घर पर है। यह एक संदेश है कि अगर आप पृथ्वी से खिलवाड करोगे तो घर मे छिपकर हि बैठना पडेगा। मानव प्रगती अगर आपत्ती बन जाये तो फिर वही पलट कर मानव संहार का कारण बन सकती है। इससे यह अनुमान लगता है कि मानव दया, परोपकार कि वृत्ती हि मानव को बचा सकती है।
प्राणी, पशु, पक्षी, तथा वृक्षो का सरंक्षण और संवर्धन हि मानवता है। यही मानवता विश्व कल्याण हेतू काम आयेगी।

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Dr. Rajdeep Deshmukh 15 MAR AT 9:54

यह जगत हर प्राणी, पशु, पक्षी, कीटक और मानव सभी के लिये है। हर एक को जिने का अधिकार है।
मनुष्य ने हर एक प्राणी, पशु, पक्षी, कीटक के प्रति दया का व्यवहार करना चाहिये। अगर इस पुरे पृथ्वी पर दया का अभाव हो जाये तो करुणा जन्म लेती है।
करूणा किसी भी रूप मे (विषाणू)आकर हर मनुष्य में करूण रस उत्पन्न कर सबको भयभीत बनाती है। जब संसार में दया का वास्तव बढने लगेगा तब फिर से संसार एक नियमित रूप से चल पायेगा।

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Dr. Rajdeep Deshmukh 28 FEB AT 16:05

Human thoughts control our mind
and if it is positive then positive happens. One have to control his/her own thoughts.
So, always be positive.☺️👍👍

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