16 OCT 2024 AT 15:42

तेरी चाहत का, बस इक, इशारा सही।
डूबते को तो, तिनके का, सहारा सही।।

प्रीत को, इक बार, बयां करना जरूर।
रोक लेना, तुम दिल मे, दोबारा सही।।

यूँ ही, मिलते नहीं है, धरा पर कोई।
खुदा को नहीं, जब तक, गवारा सही।।

फूल खिलने की, भी तो, वजह है यहाँ।
जरा समझो, कुदरत का, नजारा सही।।

तेरी दुनियॉ के, होंगे, कई तलबगार।
मुझ सा न होगा, लेकिन, तुम्हारा सही।।



- लेखनी कीर्ति की