ख़ामोशी ख़ामोशी की चादर ओढ़ा दी जो तुमने मुझेतनहाइयाँ तुम्हारी फिर गूंजती क्यों हैं? - दिव्यम्
ख़ामोशी ख़ामोशी की चादर ओढ़ा दी जो तुमने मुझेतनहाइयाँ तुम्हारी फिर गूंजती क्यों हैं?
- दिव्यम्