When I see,
It's a picture...
It's something else,
When I feel...!!!-
जहाँ हूँ व्यथित हूं देख मैं,
बढे़ अपने उस कदम को।
कि क्यों मोड़ा था उसे,
पड़ प्रभाव में संगम की ओर।
सचमुच वह धर्मपथ था ?
या दिखावे का फैशनपथ?
हो विलीन अब मैं समझा,
सायद ही तुम समझो..!!!
धर्म भीड़ नहीं हो सकता,
कभी भीड़ धर्म नहीं...!!!-
मंद मंद मुस्काती वो...!
गौर से ज़रा देखो तो,
दिखीं......?
या न दिखीं......?
दिखेंगी...!!
जरूर देखेंगी वो...!!!
खुद को ज़रा गौर से देखो तो।-
मंद मंद मुस्काती वो...!
गौर से ज़रा देखो तो,
दिखीं......?
या न दिखीं......?
दिखेगीं...!!
जरूर देखेंगी वो...!!!
खुद को ज़रा गौर से देखो तो।-
छोटे-छोटे दीपक मिलते हैं,
होता है जगमग सारा घर।
अपनों की खुशियां मिलती हैं,
होता है वह उत्सव का प्रहर।
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छोटे-छोटे दीपक मिलते हैं,
होता है जगमग सारा घर।
अपनों की खुशियां मिलती हैं,
होता है वह उत्सव का प्रहार।
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छोटे-छोटे दीपक मिलते हैं,
होता है जगमग सारा घर।
अपनों की खुशियां मिलती हैं,
होता है वह उत्सव का प्रहार।
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बरसती असंख्य बूंदें,
निकल नितल सागर से।
जाती मिल फिर वे सागर में,
ठहरती कुछ ही बूंदे...!!!
बन मोती जीवन में ।।।-
सवार हैं खुशियां लघु लहरों पर,
हैं रुकी नहीं ये कहीं...
मिल जाए जो वहां पहुंचने पर;
पाए उसे एक अच्छा तैराक ही,
है तारम्यता जो बैठाए लहरों पर।-