Deepali Agrawal   (Deepali)
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असां तां जोबन रुत्ते मरनां - शिव कुमार बटालवी
Joined 30 April 2017


असां तां जोबन रुत्ते मरनां - शिव कुमार बटालवी
Joined 30 April 2017
2 AUG 2020 AT 22:31

इब्तिदा भी तुम इंतिहां भी तुम
तेरे बिन ऐ दोस्त, हर दास्तां अधूरी है
- दीपाली

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28 JUN 2020 AT 11:43

जीवन चलते रहने को कोई तो रस्ता हो साथी
जो मंज़िल पा जाते हैं आगे क्या करते होंगे
- दीपाली

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24 JUN 2020 AT 10:49

पुकारे जाने पर सब तो नहीं रुकते
कुछ इसलिए भी जाते हैं कि,
पुकारा नहीं गया

तुम एक बार सदैव पुकारना
हर जाने वाले को
ताकि कोई ग्लानि न रहे

ग्लानि न रहे कि
मौत से पहले
तुम लग सकते थे उसके गले
- दीपाली

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10 JUN 2020 AT 15:34

लोगों को महसूस करवाते रहो
कि कितने ख़ूबसूरत हैं वे

आलोचना भी करना तो यूं कि
कोई बेहतर ही बने

किसी का दिल दुखाने से
ईश्वर की उम्र कम होती है
- दीपाली

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8 JUN 2020 AT 14:29

प्रकृति, प्रेम और संगीत
इतना भर ही तो है जीवन

तुम अपने बच्चों से कहना
किसी नदी किनारे बैठ कर
हवाओं के शोर में लिखें
एक प्रेम-पत्र
- दीपाली

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7 JUN 2020 AT 10:27

इंक़लाब खोज ही लेता है रास्ते अपने
दरिया का सारा पानी
समुद्र में नहीं मिलता
- दीपाली

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4 JUN 2020 AT 19:23

जब तुम कभी किसी मौके पर 'कभी-कभी' के 'अमिताभ' सी कविता सुनाओगे तो मैं कहीं भीड़ में बैठी 'राखी' सी सुनूंगी पर फ़िर ताली नहीं बजाऊंगी जैसा उसने किया, मैं तो नाचूंगी कि नटराज की प्रतिमा में हलचल होगी और गाऊंगी कि गंधर्व भी सुनेंगे वो राग जिसके हर स्वर से प्रेम की ध्वनि का आविर्भाव होगा।

चलायमान हो जाएंगे त्रिभुवन के सूर्य और तारे जब मेरे गायन नाद से अक्षर आएंगे कि 'वो कविता मेरे लिए थी'।

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29 MAY 2020 AT 16:19

पश्चिम से विदा होता है सूरज
विदा में वेदना होती है
पूरब में तपन है बहुत
दक्षिण में कहते हैं यम का वास है
इसलिए, प्रेम को उत्तर में होना चाहिए
प्रेम ही तो है सभी समस्याओं का उत्तर
- दीपाली

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22 MAY 2020 AT 11:28

तारों के टूटने में भी पीड़ा है कितनी
पत्थर का दिल चाहिए
फूल तोड़ने के लिए
- दीपाली

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21 MAY 2020 AT 23:40

गर ये सूरज बुझ जाए तो दीप भरी एक नगरी हो
इन बंजर हालातों पर उम्मीद भरी एक बदरी हो
- दीपाली

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