Chandra Prakash Bishnoi   (चन्द्र प्रकाश)
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Joined 20 January 2018


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Chandra Prakash Bishnoi 12 DEC 2018 AT 23:18

इश्क़ मोहब्बत के मु'आमलात में ज़रा पिछड़ गए थे हम,
तुमने हाथ पकड़ कर अब चलना सिखाया है।

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Chandra Prakash Bishnoi 12 DEC 2018 AT 21:13

कहानियाँ किस्सों में हर रोज़ इज़ाफ़ा करती है
जिंदगी है या क़िताब, पन्ने पलटने में देर नहीं करती।

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Chandra Prakash Bishnoi 8 SEP 2018 AT 20:06

Two awkward soul make best of the companion.

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Chandra Prakash Bishnoi 24 AUG 2018 AT 12:29

आज़ादी की परिभाषा जल्दी सीखते है वो लोग
जिनके पैरों में बचपन से बेड़ियां हैं।

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Chandra Prakash Bishnoi 18 AUG 2018 AT 23:15

हम मुस्कुराहट से ही काम चला लेते है,
मुखौटे तो खैर अब सियासत में उतर आये है।

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Chandra Prakash Bishnoi 18 AUG 2018 AT 22:55

साँझ ढलने लगी है, सूरज डूबने चला है
कोई शख़्स क़लम काग़ज़ लेकर
खाली हो चुके बगीचे में बैठकर लिखने की शुरुआत कर रहा है।

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Chandra Prakash Bishnoi 18 AUG 2018 AT 22:50

मैं शीशे की तरह टूट कर बिखर जाना चाहता हूँ
फिर तराश कर ख़ुद को हीरा बना सकूँ।

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Chandra Prakash Bishnoi 2 AUG 2018 AT 17:06

ख़ुद को गलाया आतिश में तूने रात दिन,
सोने की तलाश में
सोना मिला,
पर सोने को चैन कहाँ!?

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Chandra Prakash Bishnoi 1 AUG 2018 AT 23:01

गली में मकान बहुत थे, पर कोई घर न मिला
शायद हम उम्मीदें ऊँची लगाए बैठे थे।

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Chandra Prakash Bishnoi 1 AUG 2018 AT 22:18

क्या करूँगा मैं तुम्हारे रोशनी से भरे शहर मैं रहकर
खुले आसमाँ में अमावस की रात तो मुझे गांव में ही नसीब होती है।

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