Avinash Singh   (AVINASH KUMAR SINGH)
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And the rest is rust and stardust .☺
Joined 5 November 2017


And the rest is rust and stardust .☺
Joined 5 November 2017
7 MAY AT 8:51

जिसकी हसरतें दिल में थी वो हिसाब हो गया ,
दहशतो के हाकिम सुपुर्दोंख़ाक हो गया ,

सिंदूर को उजाड़ा था जिसने नफ़रत के नाम पर ।
सिंदूर से की आँच से वो हर्फ़ राख हो गया ।


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4 APR AT 8:15

मैं राजद्रोह कॉमेडियन सा
तुम रीलबाज़ हो Blunt प्रिये ,

मैं वक़्फ़ बोर्ड का मेम्बर हूँ
तुम घिबलीवादी झण्ड प्रिये ।

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21 MAR AT 18:13

जब घनघोर अंधेरे प्रकाश को हर लेंगे ,
ज़ब हम जीवन को शोकाकुल कर लेंगे ,

जब वसुधा में तम की रेखा छा जाएगी ,
जब शोणित की धार सतह पर आ जाएगी ।

जब वायु में विष का समावेश होगा,
जब केवल ब्रह्मांड में अंत शेष होगा ।

तब कालकूट पीने महादेव आएंगे ,
जिनके हिस्से विष होगा वो शिव पाएँगे ।

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4 DEC 2024 AT 5:28

यात्रा क्या है
एक संपूर्ण जीवन चक्र है
कभी समतल कभी वक्र है

ज्ञान है , उन्माद है , अनुभव है संवाद है
ऊर्जा का नवसंचार है
जीवन का अलंकार है

पहाड़ की सफ़ेदी , जंगल की हरियाली
भोर की ओस , सुबह की लाली
दोपहर की बयार , साँझ का सुकून
रात्रि का मौन , सपनों का जुनून

यात्रा कर्म है , धर्म है
मानवता का मर्म है ।
तपस्या है आराधना है
यात्रा ईश्वर की उपासना है ।

यात्रा अर्थ है उस प्रश्न का
की हम कौन हैं
हम यात्री हैं
जन्म से लेकर मृत्यु के पश्चात्
अंतिम यात्रा तक
हम यात्री हैं ।



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22 NOV 2024 AT 11:25

ख़ुद को इतना जो हवादार समझ रक्खा है
क्या हमें रेत की दीवार समझ रक्खा है

हम ने किरदार को कपड़ों की तरह पहना है
तुम ने कपड़ों ही को किरदार समझ रक्खा है

मेरी संजीदा तबीअत पे भी शक है सब को
बाज़ लोगों ने तो बीमार समझ रक्खा है

उस को ख़ुददारी का क्या पाठ पढ़ाया जाए
भीख को जिसने पुरूस्कार समझ रक्खा है

तू किसी दिन कहीं बे-मौत न मारा जाए
तू ने यारों को मदद-गार समझ रक्खा है.

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3 SEP 2024 AT 10:12

जब तलक ये हो न जाए खून पानी ,
जब तलक ख़्वाबो का मंजर आसमानी ,

जब तलक तूफ़ान से भिड़ने का बल है
जब तलक दस्तार सिर पर ही अटल है ।

जब तलक़ शोणित रगों में खौलता हो ,
जब तलक़ ब्रह्मांड बाग़ी बोलता हो ,

जब तलक प्राणो की बाक़ी हो आहुती
जब तलक ललकारती हो राजपूती ।

तब तलक मैं हार का दामन न लूँगा
सिर कटे तो धड़ से भी मैं लड़ पड़ूँगा ।

तब तलक मैं काल से भी ना डरूँगा ।
मैं विजय की चाह में ज़िंदा रहूँगा ।।

तब तलक

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23 JUL 2024 AT 23:15

जिसने सच्ची संघर्षों पर हंसने का पाया हुनर
जिसने कुंठित अभिलाषा से तंज कसा हो जीवन पर

जो शरणागत होकर भी समझे ,धन को अपना सर्वोपर
जिसने तिरस्कार की वाणी , अपना ली हो मित्रों पर ,

हे ईश्वर ! उसे सबकुछ देना , देना मत बस मित्र प्रखर ।।

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23 JUN 2024 AT 20:55

सितम का जो भी समय था
गुजारा जा चुका है ,
तुम्हारा वजूद बहुत पहले मारा जा चुका है

वो शख़्स सितारा था कभी ,
मेरी पलकों का ।
उसे अब ज़ेहन से भी ,
उतारा जा चुका है ।

तुमसे चाहत बहुत थी ,
ये भूल थी मेरी ,
मगर इस भूल को सुधारा
जा चुका है ।

अब जो भी समय आएगा ,
वो सब मेरा है ।
जिसे तुम अपना समझ बैठे हो वो वक़्त,
तुम्हारा जा चुका है ।

अभी तक होता है मेरा
जिक्र ज़िंदादिली में ,

जिगर में आग मेरे अब , दुबारा जा चुका है ।

मेरी ख़ुद्दारी मेरी नसो में उबलती है
तुम्हारा खून तो पानी बनकर सारा जा चुका है ।

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14 JUN 2024 AT 16:34

ये सही ग़लत की क़वायदें , ये नामुराद दुनिया
ये सारी फ़र्ज़ी कहावतें , है अपवाद दुनिया ,

ये रुझानों के आशिक़ , ये फ़सादी लोग ,
यही कारण है कि है परिवाद दुनिया ।

ये गुनाहो का दौर , और ये चुप्पी तुम्हारी
मैं ये समझा था की है आज़ाद दुनिया ।

ये नफ़रत के बीज , ये सारे तमाशबीन ,
चलो मिल के करदें हम बर्बाद दुनियाँ ।

कुछ मज़हबी दरिंदे , कुछ निरे बेवक़ूफ़
न होने देंगे कभी ये आबाद दुनियाँ ।

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14 JUN 2024 AT 16:00

कुछ इस क़दर उनका ज़मीर बिका
उन्हें राफ़ा दिखा रिआसी नहीं दिखा ।


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