Avinash Kumar   (अविनाश “कर्ण”)
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Joined 14 July 2017


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27 FEB AT 11:24

बँटवारा मोहब्बत में , जब चर्चे में आयेगा
पूछेंगे सब, चंदा किसके हिस्से में आयेगा

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17 FEB AT 14:07

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14 FEB AT 19:52

रात है गर तो महताब होना चाहिए
नींद में तेरा ही ख़्वाब होना चाहिए

फूल, ख़त,चंदा-तारे पुराने हैं सभी
तोहफा हो तो नायाब होना चाहिए

होंठ पे तेरे जानाँ, हँसी आये जभी
बाग को पूरा, शादाब होना चाहिए

बात है कैसी, कैसे बताऊँ मैं तुम्हें
इश्क़ में जानाँ बेताब होना चाहिए

रास्ते ये सारे, जाते हैं तेरी ही गली
छोर से जन्नत पायाब होना चाहिए

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26 JAN AT 9:36

इस देश में सबकी विशेष पहचान है
समरूप हैं सब, कह रहा संविधान है

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23 JAN AT 20:43

उसी के हो, हिमायत क्यूँ नहीं करते
ऐ दिल मेरे, मुहब्बत क्यूँ नहीं करते

चुराता, हर अमावस, चाँद है कोई
सितारों तुम बग़ावत क्यूँ नहीं करते

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1 JAN AT 8:41

अच्छा बुरा सब याद रक्खा जाएगा
पर दिल सदा ही शाद रक्खा जाएगा

यह साल हो बेहतर पुराने साल से
सो एक नया इरशाद रक्खा जाएगा

कि तोहमत लाखों लगे दिल पे, मगर
अब दिल ये आजाद रक्खा जाएगा

वादे सभी दिल में रखो महफ़ूज तुम
हर ख़्वाब को आबाद रक्खा जाएगा

वो साथ हो तो बात क्या है फिक्र की
मंज़िल, सफर से याद रक्खा जाएगा

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22 DEC 2020 AT 10:49

सीने से लग मेरे मेरा हाल पूछता
काश कोई मेरे भी माथे पे चूमता

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17 DEC 2020 AT 19:46

सियासी ये साहब लहू माँगते हैं
कि टूटे मरासिम, रफू माँगते हैं

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4 DEC 2020 AT 20:02

हिज्र में क्या क्या नहीं लुटा दिया हमने
याद रखना था जिसे, भुला दिया हमने

जिंदगी की बात करते, हम भला कैसे
संग ख़त के रब्त भी जला दिया हमने

बारहा महताब से ये बे-फ़िज़ूल तुलना
तंग आ कर, चाँद ही चुरा लिया हमने

जो लगे ढूंढने सितारे, चाँद को नभ में
शाम को छत पे उसे बुला लिया हमने

काश की होता ये एक स्वप्न बेमतलब
जाग के लगता जहाँ ये पा लिया हमने

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20 NOV 2020 AT 18:02

छठ जे बरस भइर के बाद अबई छै
सूरज तखैन, समय के बाद उगई छै

जाईब नै सकलियै घर जे इ बेर हम
घर, घाट अंगना सब यादि अबई छै

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