Avinash Kumar   (अविनाश "कर्ण")
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Joined 14 July 2017


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Avinash Kumar 6 JUL AT 8:06

चाँद है बिन्दी तेरा, आँचल में सितारे रहते हैं
सारे जहाँ के मोजिज़े सिर्फ तुम्हीं में बसते हैं

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Avinash Kumar 2 JUL AT 21:41

ये दिल भी तब इक नाव सा चढ़ता उतरता है
जब वो उसका आँचल मुझे छू कर गुजरता है

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Avinash Kumar 2 JUL AT 9:21

चाँद तारों संग, मुलाक़ात होने से पहले
तुम चली आना ज़रा रात होने से पहले

इश्क़ की बातें, नहीं जानता है हर कोई
जान भी अंजान थी, बात होने से पहले

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Avinash Kumar 26 JUN AT 13:09

मुझे पता है कि
तुम्हें चाँद बेहद पसंद है
और शायद उससे
थोड़ा अधिक पसंद हूँ मैं
मगर, फिर भी कभी
यदि
तुम्हें दिया जाए मौका
करने का चुनाव
चाँद और मेरे बीच
तुम चाँद चुनना
तुम हर दफ़ा
बस चाँद ही चुनना
क्योंकि उन चीज़ों को
नहीं चुना जाता
जो पहले से ही
तुम्हारी अमानत हो ॥

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Avinash Kumar 21 JUN AT 16:22

प्रियतमा के
लहराते आँचल ने
जब सूरज के
चेहरे को छुआ होगा,
भूला कर
ताप अपनी
सूरज भी
शरमा कर कहीं
छिप गया होगा।

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Avinash Kumar 21 JUN AT 8:23

कड़ी धूप में हैं बिल्कुल, ठंडी छाँव की तरह
शहर सी ये ज़िंदगी, हैं वालिद गाँव की तरह

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Avinash Kumar 19 JUN AT 13:17

मुझे अक्सर होती है
चिढ़ और जलन
उन सभी लोगों से जो
करते हैं प्रयोग वाक्यांश
'प्रेम की पराकाष्ठा' का
.
मैं पूछना चाहता हूँ कि
कैसे ढूँढ लिया उन्होंने
अंतिम छोर व सीमा
उस एहसास का
जो सदा से ही अनंत है
.
और साथ ही साथ ये
कि मुझसे कहाँ हो गई
भूल या रह गई कमी
जो मैं न पा सका
'प्रेम की पराकाष्ठा' ॥

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Avinash Kumar 14 JUN AT 18:44

क़ज़ा पर तेरी, सब फूट फूट कर रोयेंगे
ऐ ख़ुदा, हम तुझसे भी रूठ कर रोयेंगे

ज़मीं का सितारा जो फ़लक ले गया है
सितारे सभी आसमां से टूट कर रोयेंगे

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Avinash Kumar 13 JUN AT 10:13

गर ईश्वर ने
कभी दरख़्तों से पूछा
कि उन्हें क्या चाहिए ?
तो संभव है कि
वो भूला कर अपने
सूख जाने की पीड़ा
व काट दिए
जाने का डर
.
माँग बैठे
पता
उन सभी पंछियों का
जो लौट के फिर
कभी वापस न आए

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Avinash Kumar 10 JUN AT 9:11

“ बोगनवेलिया ”

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