Avinash Kumar   (अविनाश 'कर्ण')
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Joined 14 July 2017


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Joined 14 July 2017
Avinash Kumar 21 JAN AT 12:00

"इश्क़" को
मुकम्मल करने की
बेइंतिहा और बेहिसाब
कोशिश में
अक्सर ही लोग
भूल जाते हैं
कि
ये इश्क़,
इश्क़ शब्द
और इसकी
मूल परिभाषा
पूर्ण होती है
तो एक
ख़ास अधूरेपन से ।

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Avinash Kumar 16 JAN AT 16:06

जुगनू सारे के सारे हैं बन चुके सितारे
बाक़ी है तेरा पूनम का माहताब होना

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Avinash Kumar 11 JAN AT 14:10

जब भी कोई शख़्स
डूबा होता है प्रेम के
अनंत गहराइयों में,
उसकी निगाहें ढूँढ लेती हैं
वो सब कुछ
जो छूट जाता है
आम नज़रों से....

( अनुशीर्षक में पढ़ें )

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Avinash Kumar 7 JAN AT 10:42

जब कभी भी
पुरुष के किसी
दोष का दण्ड
एक स्त्री को
चुकाना पड़ा है
.
स्त्री ने
सफाई देने से
बेहतर समझा है
आजीवन
पत्थर हो जाना

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Avinash Kumar 3 JAN AT 11:17

तुम अगर न आई तो चंदा भी न आएगा
नींद भी न आयेगी जागा भी न जाएगा

शब ये कब तलक बन के बैठे अजनबी
आसमां से अब संभाला भी न जाएगा

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Avinash Kumar 1 JAN AT 13:02

बीतते समय के साथ, समय भी बदल जाता है
तारीख़,महीना,साल और हाल बदल जाता है

बस ये तिरा इश्क़ है जो मुझे बदलने नहीं देता
वरना ये चाँद भी हर रात थोड़ा बदल जाता है

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Avinash Kumar 23 DEC 2019 AT 17:00

हर रात ये चाँद बेझिझक मिलने आता है सबसे
पर अमावस को उससे मिलने जाता कौन होगा

इश्क़ के दरिया में डूबने की, बातें सभी करते हैं
मगर हक़ीक़त में डूब के, पार जाता कौन होगा

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Avinash Kumar 18 DEC 2019 AT 16:12

हर तरफ़ सियासत का बेहूदा मंज़र दिखता है
अब तो हुकूमत को कलम भी ख़ंजर दिखता है

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Avinash Kumar 12 DEC 2019 AT 13:16

हर वो शख़्स जिसे
दिखा नहीं चाँद
अमावस की रातों में,
जिसे हासिल ना हो सका
प्रेम के प्रतिउत्तर में
समुचित प्रेम,
उसने कह दिया
कि अमावस का चाँद
कुछ भी नहीं
बस एक मनगढ़ंत बात है,
उसे देखने वाले लोग
बिल्कुल अंधे हैं,
और कर दिया ऐलान
कि प्रेम अक्सर लोगों को
अंधा बना देता है ।

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Avinash Kumar 4 DEC 2019 AT 12:46

"मरुस्थल"
प्रमाण है
इस बात का
कि अत्यधिक इंतज़ार,
उपेक्षा और तिरस्कार से
सूख जाता है कभी न
ख़त्म होने वाला
अथाह प्रेम का दरिया,
और चट्टान की तरह
शुष्क और सख़्त
बन जाते हैं,
कभी पानी से रहे
सरल, स्वछन्द
प्रेमी ।

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