Avinash Kumar   (अविनाश "कर्ण")
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Joined 14 July 2017


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7 SEP AT 12:07

किसी की याद में,
जो आँखों से टपकता है
प्रेम का मोती,
वो अक्सर
लबों को चूमकर जाता है
.
.
बेवजह कुछ भी
नहीं होता प्रेम में,
मिठास प्रेम में
खारेपन के बाद ही आता है।

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31 AUG AT 9:02

तुम्हारी याद में लिखी गई
एक-एक कविता,
मेरे प्रेम की
दूसरी सबसे बड़ी पूँजी है,

तुम्हारे हाथों
लिखे गए
उस एक प्रेम-पत्र का स्थान
सदैव पहला रहेगा।

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24 AUG AT 14:28

अंधेरे में नहीं,
रौशनी में आकर
खो जाने को,

कोरी कल्पना या
मजाक समझने वालों,

यकीनन ही,
तुमने आज तक
महबूबा की आँखों का
नूर नहीं देखा

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21 AUG AT 14:12

तुम्हारे वादे अब सच्चे नहीं लगते
सितारे चाँद को अच्छे नहीं लगते

इशारे वस्ल के, तो अब ज़रूरी हैं
ये चर्चे हिज्र के अच्छे नहीं लगते

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15 AUG AT 8:24

कभी मज़हब के ख़ातिर अब न दंगा हो
कि मज़हब हो अगर, तो बस तिरंगा हो

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3 AUG AT 10:26

जब जब सितारे टूट कर
आसमां की चादर से
ज़मीं पे गिरते हैं

तब तब बहनें समेट कर
वो सभी सितारे
टाँक देती हैं एक धागे में

और फिर बांध देती है
भाई की कलाई पे
सितारों सा चमकता भाग्य
और आसमां जितना प्रेम

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1 AUG AT 20:55

एक आम ज़िंदगी भी
अख़बार की तरह
हो चुकी है,
जिसे आधुनिक समाज के
अधिकांश लोग
या तो
पढ़ना ही पसंद नहीं करते
या फिर
बस उपर उपर देख कर
सीधे
घटित हो रहे खेलों की
ख़बर लेने में लग जाते हैं।

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31 JUL AT 21:06

प्रेम में डूबी स्त्रियाँ
न के बराबर देखती हैं
आईना
.
वे भांप लेती हैं
प्रियतम के भाव से
अपने श्रृंगार की
बारीकियाँ ।

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19 JUL AT 7:48

प्रतीक्षा
प्रेम में की जाने वाली
सबसे जटिल क्रिया है...

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16 JUL AT 7:44

निगाहों को, छिपाना भी नहीं आता
मुझे उल्फ़त, जताना भी नहीं आता

तुम्हें तो गम कभी, छूता नहीं जानाँ
किसी को मुस्कुराना भी नहीं आता

ये चंदा भी न जाने, छुप गया है क्यूँ
सितारों, क्या मनाना भी नहीं आता

मिरी ये रूह पत्थर है, बरस भर से
मुझे अब, टूट जाना भी नहीं आता

ये नगमा प्रेम का है कर्ण कुछ ऐसा
तुम्हें यह, गुनगुनाना भी नहीं आता

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