खामियाँ हैं किसमें नहीं ,
हैं तुझमें भी,हैं मुझमें भी।
स्वीकार करें,तब सुधार करें,
वो दूर हो सकती हैं तभी।
दूजी पर अधिक न गौर करें,
उनकी कर सकते चर्चा ही।
अपनी सूची पर ध्यान रखें,
सुधार हम सकते उनको ही।
वो खत्म हों एक बारी में
यह तो है ज़रूरी नहीं।
और हिम्मत बांँध कर डटे रहें,
बेकार होंगी,कई कोशिशें भी।
पर कोशिश कभी न थमने पाए,
आशा की किरण न बुझने पाए।
जो बनें रहें हम, चिर प्रयत्नी,
मिस्मार होंगी सभी की सभी।
- AJ ✍️
15 JUN 2022 AT 13:28