Ashish Niranjan Singh   (आशीष निरंजन)
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मुस्कुरा देती थी वो मेरा नाम सुनकर,
इतनी दूर तक गया था रिश्ता हमारा..❤️
Joined 6 May 2018


मुस्कुरा देती थी वो मेरा नाम सुनकर,
इतनी दूर तक गया था रिश्ता हमारा..❤️
Joined 6 May 2018
30 JAN 2022 AT 17:16

तमीज़दार होने का एक नुक़सान यह भी है,
कि हज़ारों बातें दिल के अंदर ही रह जाती हैं..

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26 FEB 2021 AT 17:10

जो सबके हो गए !
वो किसी के नहीं रहे !!

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13 OCT 2020 AT 11:20

कोई नाम भी ले उनका दिल तड़प उठता है,
हमने चाहा है उन्हें अपनी इज़्ज़त की तरह..

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13 OCT 2020 AT 11:16

यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें,
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो..

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13 OCT 2020 AT 11:09

राख के ढेर पे क्या शो'ला-बयानी करते,
एक क़िस्से की भला कितनी कहानी करते..

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2 SEP 2020 AT 10:02

घर अन्दर ही अन्दर टूट जाते हैं,
मकान खड़े रहते हैं बेशर्मों की तरह..

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22 AUG 2020 AT 15:21

क्या एक मुलाकात ऐसी नही हो सकती ।।

की मैं मर जाऊ और दफ़नाने तुम आओ।।

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21 AUG 2020 AT 22:14

सफ़र में कोई किसी के लिए ठहरता नहीं,
न मुड़ के देखा कभी साहिलों को दरिया ने..

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19 AUG 2020 AT 21:54

गलतियों से जुदा तु भी नही मैं भी नहीं,
दोनों इंसान हैं, ख़ुदा तु भी नहीं मै भी नहीं।

तू मुझे और मैं तूझे इल्ज़ाम देते है,
मगर अपने अंदर झांकता तु भी नहीं मैं भी नहीं।

गलतफहमियों ने करदी पैदा दूरियां,
वरना फितरत का बुरा तु भी नहीं मैं भी नहीं ।

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10 JUL 2020 AT 21:26

समन्दरों में मुआफिक हवा चलाता है
जहाज़ खुद नहीं चलते खुदा चलाता है

ये जा के मील के पत्थर पे कोई लिख आये
वो हम नहीं हैं, जिन्हें रास्ता चलाता है

वो पाँच वक़्त नज़र आता है नमाजों में
मगर सुना है कि शब को जुआ चलाता है

ये लोग पांव नहीं जेहन से अपाहिज हैं
उधर चलेंगे जिधर रहनुमा चलाता है

हम अपने बूढे चिरागों पे खूब इतराए
और उसको भूल गए जो हवा चलाता है

-राहत इंदौरी

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