मैं हार नहीं मानूंगा,
रार नही ठानूँगा
कुछ श्रेष्ठ विचारों की
पौध रोप जाऊंगा
उच्च आदर्श जल से
फिर उन्हें सींच जाऊँगा
मातृभूमि भारत को
निज उर्वरा करूंगा अर्पित
स्वच्छ राजनीति के ढ़ेरों
नवांकुर करूंगा पुनर्जीवित
प्रकृति नियमानुरूप जीर्ण काया
को तो त्याग जाऊंगा
तेजस्वरूप निजप्राण को
यहीं प्रज्ज्वलित कर जाऊंगा
अटल भारत का अटल हूँ,
होकर अमर यहीं रह जाऊंगा
राजनीति के फलक पर
नैतिकता में नज़र आऊंगा
मैं हार नही मानूंगा,
मैं रार नही ठानूँगा
- आरती ओझा
16 AUG 2018 AT 19:08