Arpit Dwivedi   (गब्बर)
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Student of Bsc.Ag.Hons. at AKS
Buisness consultant at MLM
Whatsap : 7389502148
Joined 11 June 2019


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Arpit Dwivedi YESTERDAY AT 23:49

क्या मेरे लिए तुम जान दोगे, नहीं चाहिए.......
ये कागज़ की दौलत ये पानी के रिश्ते, नहीं चाहिए..... !!
जो देना हो कुछ, तो कर लेना इबादत माँ बाप की.......
वरना ये तसल्ली की भीख ज़माने में, नहीं चाहिए.... !!!
अर्पित द्विवेदी.

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Arpit Dwivedi YESTERDAY AT 15:58

क्या हुआ बदनाम करना है, सबूत तो सारे लाये हो न......
जो उड़ गया गवाह अगर, जज तो फर्जी लाये हो न...... !!
मै तो गरीब हु इंसाफ मेरा ईमान ही है......
हार गया तो होगा वही, तुम कफन साथ लाये हो न.... !!!
अर्पित द्विवेदी.

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Arpit Dwivedi 10 NOV AT 8:47


कल सपने में फिर मिली व्ही, जो कहती मुझको बींद......
हाथ में था ग्लास दूध का, मिली हुई थी हींग......
खुश इतना था की मत पूंछो, थी तैयारी पूरी......
बद्किस्मत भी इतना था मै, खुल गयी मेरी नींद.... !!!!
अर्पित द्विवेदी.

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Arpit Dwivedi 9 NOV AT 23:37

इश्क़ ही तो है आज हमसे हुआ कल किसी और से होगा (2)...... है तो फैसला सही मगर धोका है, आज हमसे हुआ ह कल तुमसे भी होगा.... !!!
अर्पित द्विवेदी.

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Arpit Dwivedi 9 NOV AT 18:41

कतरा कतरा टूटा था मै.......
अपनों से ही रूठा था मै......(2)!!
कहता करता कब क्या कैसे ...
कितना बड़ा झूठा था मै..... !!!!
अर्पित द्विवेदी.

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Arpit Dwivedi 8 NOV AT 1:03

ज़रा सी लड़खड़ाहट मेरी, उसकी चहल कदमी बढ़ा देती थी...... मेरे रोने की आवाज, उसकी धड़कने बढ़ा देती थी....... और आजतक न की माँ ने मुझसे शिकायत मेरी नादानियों की ..... वो अकेली थी, जो मेरे ज़िद को करने पूरा कड़ी धूप में निकल जाती थी..... !!!
अर्पित द्विवेदी.

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Arpit Dwivedi 7 NOV AT 18:55

मत जता ये जतन मुझको, दीवानगी से तेरे वाकिफ है हम...... कहकर मौत ठुकराए ज़माना जिसे, उसी ज़हर को गटक रोज ज़िंदा है हम..... !!!
नादानियाँ ये नख़रे अब बंद कर, इन सब से मुखातिब तो कब से हम........ जुबां जली थी जिस गर्म चाय की प्याली से, उसे तो कबका छिपा चुके है हम..... !!!
अब तो बाकि सिर्फ़ यादें है, उन लम्हो से तो कब का बिछड़े है हम....... केह दो इन हवाओं से की बहना छोड़ दे, बिना इनके भी जीना सीख चुके है हम..... !!!!
अर्पित द्विवेदी.

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Arpit Dwivedi 7 NOV AT 0:17

तुम कहते हो मजबूरी है, फिर हमने क्या शौक पाला था....(2)
थे तो तुम गोरे रंग के, अफ़सोस दिल बहुत काला था..... !!!
अर्पित द्विवेदी.

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Arpit Dwivedi 6 NOV AT 1:03

तुम क्या समझते हो, देखोगे नहीं तो हमे दर्द होगा क्या........
तेरी बेचैनी के ख्यालो से हमे सरदर्द होगा क्या...... !!
दावा है मेरा कदम फिर लौटेंगे तुम्हारे वापस यहीं ......
वहां ग़म मिटाने को हमसा कोई हमदर्द होगा क्या......!!!
अर्पित द्विवेदी.

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Arpit Dwivedi 4 NOV AT 20:29

तेरी हर जरुरत का मै ख्याल रखता हु......
सोता भी रहू मगर, तुझे सपनो में साथ रखता हु....... !!
तेरी रग रग से वाकिफ हो चुका हु मै इस क़दर........
तू साथ छोड़ भी दे तो नक्शा साथ रखता हु..... !!!
अर्पित द्विवेदी.

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