मेरी आंखों से जब खुद को देखती हो तुम
खुद में खुद को समेट लेती हो तुम
अपनी आंखों की गुस्ताखियाँ कहूं या तेरी आंखों कि कहानियां
अपनी आंखें मुझसे चुरा कर जब मुस्कुराती हो तुम,
सुंदर को और ज्यादा सुंदर बना देती हो तुम।-
मुझे पढ़ना पड़ेगा
मुझे सीखने के लिए
मुझे महसूस करने पड़ेगा
तो... read more
यें बरसाते यें बारिश कि बूंदें
ये बादल ऐसा टूट के बरसे
मिलने को तुम्हारा दिल भी तरसे
कभी भी तो ऐसा हो...
तनहाई हो, दिल हो, बूँदें हों, बरसात हो
और तुम आओ....-
दिन भर की थकान अब मिटा लीजिए,
हो चुकी रात रोशनी बुझा लीजिए,
एक खूबसूरत ख्वाब राह देख रहा है,
बस पलकों का परदा गिरा लीजिए!!-
फिज़ा में मौसम-ए-गुल की तारीफ़ क्या करूं,
इतनी हसीन रुत में फितरत से गद्दारी कैसे करूं,
तेरा दामन हो तेरा दिल हो या फिर तेरी आँखें,
कमबख्त गुजरता वक्त से वफादारी कैसे करूं।-
"खामोश सा माहौल है बैचेन सी ये करवट,
"न आंख लग रही है, न रात कट रही है।।-
एक रात एक बात लिखूंगा ,
खुद को दाग़, तुझे साफ लिखूंगा ।।
हक़ीकत में तू कभी मिलेगा नहीं,
एक किताब में अपनी मुलाकात लिखूंगा।।-
चूमा जो उनके माथे को तो...
बगावत उनकी गर्दन ने की...!
सरक कर मेरे होंठ जो उनके होंठ पे आई..
तो उनकी कमर ने ख्वाहिश मेरे हाथों की..!-
ना जख्म भरा, ना शराब सहारा हुई
ना वो मिले, ना मोहब्बत दुबारा हुई 💔-
किन शब्दों में लिखूं तेरी कमी को
बस तेरे बिना हर दिन अधूरा सा लगता है💔-
मसला ये नहीं है कि तुम मुझे मिले नहीं
दर्द इस बात का है कि हम तुम्हे भूले नहीं💔-