ANKIT MANRAL   (सिंह)
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Joined 8 December 2019


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Joined 8 December 2019
11 APR AT 7:50

हर रोज ये शाम आ जाती थी
नवी नवेली दुल्हन की तरह सज कर
मेरी एक नजर जाती थी वादियों से होकर
और रुकती थी बहती नदियों पर
पैर पर पैर रखकर देखता था मैं
घर से मीलों दूर खड़े हिमालय
लेकिन आज नहीं दिख रहा था
मुझे मेरे पास का गांव तक
प्रकृति ने मुझे सब कुछ दिया
लेकिन मैं उसे बदले में कुछ भी नहीं लौटा पाया
ऐसा लग रहा था जैसे सूरज थकने लगा हो
ओर बसंत की खुशबू धुएं में बदल गई हो
चांद तक अपनी पहचान खो रहा था
सिसकते जंगल कह रहे थे तुमने हमारी इज्जत लूटी है
वह नई सुहागन हंसती थी तो यह देवभूमि कहलाती थी
सोचो अगर वह हंसते हंसते रो दे तो.....

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27 FEB AT 17:23

खूबसूरती को ठोकर मार मार
ना जाने किस हद की तलाश में हूं मैं
रोज एक ही जगह डूबते सूरज को देख कर
न जाने किस नजारे की तलाश में हूं मैं
यूं तो रूहानी खुशबूएं बिखरी हैं मेरे इधर उधर
फिर भी ना जाने किस कस्तूरी की तलाश में हूं मैं
यू शब्दों की मधुशाला में मदहोश होकर भी
न जाने किन सवालों के जवाब में हूं मैं
यह उमड़ती जवानी के उन्माद में होकर भी
न जाने क्यों बचपन की तलाश में हूं मैं
बचपन से अब तक मां से सीखा था प्रेम करना
न जाने अब इससे ज्यादा किसकी तलाश में हूं मैं

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26 DEC 2020 AT 8:22

Last wish
(आखिरी इच्छा)

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12 DEC 2020 AT 7:47

निशब्द एक स्त्रीत्व पर 🙏

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6 OCT 2020 AT 14:11

यह जो चेहरे हैं यह मुखोटे हैं
असल चेहरे वह हैं
जिनकी वजह से
तुम लोगों को याद रहते हो
या लोग तुम्हें भूल नहीं पाते
मासूम चेहरे और राज गहरे
प्यार वफा ओर लोगो की बातें
बस बातें है जनाब बातों का क्या

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21 SEP 2020 AT 8:36

शब्दों के सागर से
लाऊंगा मोती चुन के
उमेर दूंगा कागज पर
शायद तब भी मुझे
बेहतर शब्द ना मिले
तुम को बयां करने के
फिर भी कोशिश करूंगा
सारे शब्द नीलाम कर दूं
बस इतना जानता हूं कि
प्रेम , जैसे शब्द तुमसे सुरु
ओर तुम में ही समा जाते हैं
शब्दकोष के सबसे छोटा शब्द
होने के बावजूद भी तुम पर
भावनाओं की अभिव्यक्ति
करना इतना आसान नहीं है

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10 SEP 2020 AT 7:48

मुश्किल है उसकी खूबसूरती पर लिखना
की तारीफ में कुछ कमी हो तो शब्द रूठ जाएं
सुना है आईना भी उससे शरारत करता है
जब वह सवरने को बैठती है
अगर लगा ले वह काजल आंखों में
तो पूर्णिमा का चांद भी फीका पड़ता है
उसमें है वह सिंफनी संगीत
जो महकते हर गली शहर फिजाओं मैं
वह जैसे गर्मियों की सुबह ओर जाडो की शाम सी
काश मेरे पर वह शब्द होते जिसमें बयां हो खूबसूरती तुम्हारी
फिर कभी मिलो तो तुम तुमको ले चलूंगा उन पहाड़ों पर
जहां वादियां गाती हैं और फूल खिल खिलाते हैं
जहां गिरते झरने बहती नदियां और बहकते बादल हो
फुर्सत में लिख लूंगा तुम पर नजमा कोई
जिसमें बयां हो पहाड़ों से खूबसूरती तुम्हारी
काश तुम मिलो ❣️🤍

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22 JUL 2020 AT 7:06

शायद मिलती कभी तुम
तो दिखाता तुम्हे अपना शहर
तुम को भी चलता पता🌈
की है कोई उससे भी खूबसूरत
की खुशबू, रंग रूप सब उड जाता
मेरा शहर देख कर तुम्हारा
कास तुम कभी मिलती🌻
तो तुम्हे तुम्हे दिखाता की
यहां वादियां भी गाती है🎶🌈
खुसबू निकलती है हर रास्ते से ।
तुम मिलती कभी तो🛤️
तुम्हे दिखाता यहां हर
रास्ता स्वर्ग को जाता है 🛤️
कास तुम कभी मिलती ❤️

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12 JUL 2020 AT 6:22

बाली कंगन झुमके पायल
सब फिके है
इत्र गुलाब काजल, गहने
अरे सब फीके है
वो जो आए महफ़िल में तो
ये सब फीके है
ये काजल गहने झुमके, खुशबू
सब उसके दीवाने है
गलियां गलियां भटके खुशबू
जिस गलियों से वो जाए
हवा घटा रंग फिजा
यू फिर सब इतराए
कास वो आए झुमके पहने
खन खन करती उसकी पायल बोले
जब जब पहाड़न आए,
कास तू आए ,,,,,,

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18 JUN 2020 AT 7:57

जाते जाते में कर जाऊंगा
तुमको हैरान,
प्रेम ,इंतजार,सब्र, फिक्र,सब, ख़तम हो जाएगा
शब्दों ने जवाब दे दिया है
कोशिश ऐसी है कि मार दू कुछ बेनाम रिस्तो को
लेकिन कितना भी लिखूं कुछ ना
कुछ हमेशा छूट जाता है
में नहीं चाहता मुझे याद करे मेरा बुरा अतीत का कोई
इन सबसे दूर निकलते हुए मैं
आने का रास्ता भूल जाना चाहता हूं
कुछ प्रेम कहानियां बिन मिले अधूरी रह गई
आगे रिश्ते तभी रिश्ते जोड़े जाएंगे
जब में पुराने बेनाम रिश्तों को तोड दू
अतीत ने दिखाया है लोगो के दो चेहरे
शायद मैं पुरानी गलतियां अब न दोहराऊं
वफादार यारो से खूबसूरत उपहार कुछ नहीं
जितना भी लिखूं कम हैं कुछ लोगो पर
ये लोग पड़े लिखे होकर भी पड़ना नहीं जानते
शर्म ,मेरे शब्द करने लग गए अब
खेर धरती गोल है जिसने जैसा किया
उसे वैसा बहुत सही मिला है

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