anjalyy Sharma!   (Sanjh✍️❤️)
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Joined 7 May 2018


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Joined 7 May 2018
anjalyy Sharma! 24 MAY AT 10:24

(( A Farmer ))

अपनी आशाओं को निराशा में तब्दील होता देख,,
वो हार गया!!
जलती धूप में, जैठ की दोपहरी में, मही के तार - तार हुए घट पर,,
अपने पसीने की बौछार करने के बावजूद,,
अपनी उम्मीदों को उन शुष्क दरारों में दफना देख,,
वो हार गया!!
इन घनन घनन उमड़े नीरद की बौछार से ,आंधी में उड़ती वात की मार से,,
बरस भर फसल को लहू से सींचने के बावजूद,,
खेत में खड़ी अधपकी फसल को आड़ा देख ,,
वो हार गया!!
सरकारी फाइलों में दबी लाचारी में,, कुसीद और फर्ज के बीच जलती मसान में,,
सियासी मुद्दो का आधार होने के बाबजूद,,
अपनी अठखेली करती मेड़ो को तन्हा होता देख,,
वो हार गया!!

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anjalyy Sharma! 21 MAY AT 20:54

बदल दिया हर इतिहास जिसने,
उस इतिहास का में सत्य हूं,,
ना पहचाना हो तो बता दूं ''
सृष्टि का सार ब्रह्म हूं ,,
अजी ! में ब्राह्मण हूं!!

में पत्थर नही नदिया की धार हूं,,
राहों मे पड़े रोड़ों का ,, में एक मात्र नर संहार हूं,,
में नया नही हूं इस नगरी मे,,
इतिहास से अमर संसार हूं "
ना पहचाना हो तो बता दूं,,
सृष्टि का सार ब्रह्म हूं,,
अजी ! में ब्राह्मण हूं!!

में लेने बाला "वामन" और देने वाला "दधिची" हूं,,
में प्यार भरा "अगस्त:" और क्रोध भरा "दुर्वासा" हूं,,
में नीति धारी "चाणक्य" और पराक्रम शाली परशुराम हूं,,
मैं संत बनूं तो "सुदामा" और अहंकार पर आऊं तो रावण हूं""
ना पहचाना हो तो बता दूं ,,
सृष्टि का सार ब्रह्म हूं ,,
अजी ! मैं ब्राह्मण हूं!!

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anjalyy Sharma! 20 MAY AT 8:09

बेजान काया बन तेरे खेल को मोहब्बत मानती रही,,

और तू मेरे खामोशी भरे दिल को अपने खेल का मोहरा!!

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anjalyy Sharma! 28 APR AT 9:23

मैं वो परिंदा हूं ,,,जो पिंजरे में ही कैद रहना चाहता है"""
क्योंकि गर मैं आजाद हुआ तो ये जहां मेरी आजादी
को आवारगी में तब्दील कर देगा!!!

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anjalyy Sharma! 25 APR AT 22:16

सियासत का लिवाज पहन,,, धर्मो का बखान करने वाले ज्ञानियों को """
शहर की उन इमारतों से रूबरू कराओ ,,
जहां मस्जिद मंदिर की एक ही नींव राम - रहीम के दोस्ती के किस्से सुना रही हैं!!

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anjalyy Sharma! 18 APR AT 21:24

झुकी पलकों में छुपी खामोशी को तूने मेरे गुनहगार होने का सबूत बताया"""
जरा उन पलकों के उठने का इंतजार तो करता,, तो तुझे निगाहों में बो मन्नत दिख जाती,,
जिसकी अरदास में ये पलकें झुकी थी!!

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anjalyy Sharma! 18 APR AT 21:13

इस समाज के नियमों रूपी कचड़े को आंधी संग उड़ते देखा है मैने!!!
इक लड़की को भी ,,अपने बूढ़े बाप को कंधों पर संभालते देखा है मैने!!!

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anjalyy Sharma! 10 APR AT 22:01

बहती नदिया में भी ठहरा पानी था मैं,,,

तेरे एहसास की हवा मात्र से ही कभी ना थमने वाला निर्झर बन गया हूं !!!

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anjalyy Sharma! 30 MAR AT 20:40

उसकी पायल की छनक को ,, किसी ने चिल्लर की खनक से तोला!!!
उसकी मासूमियत भरी शरारत को लोगों ने अय्याशी बोला!!
दिन के उजाले के खातिर रात को झुलसाया जिसने ''

बड़ी हवेली मे बैठे सफेदपोशों ने अपने गुनाह
छिपाने के खातिर उसे तबायफ़ बोला!!!

कभी उसके आंगन को कोठा तो कभी जगमगाते नुक्कड़ को बदनाम गलियां बोला!!!
बंद दरवाजे के पीछे उसके दर्द में कराहती सिसकियों को तूने अपनी मर्दानगी से तोला!!
दुल्हन बना उसे रात की बटोरा उसके जिस्म को जिसने ""
उसी ने सवेरा होते ही इज्जत का नकाब चढ़ा ,,
उस दुल्हन को बेइज्जत तबायफ़ बोला!!

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anjalyy Sharma! 26 MAR AT 18:43

#kahani

मेरी कहानी के किरदार भी कितने अनोखे हैं,,,

इक में हूं जो होकर भी गुमशुदा हूं !
इक तुम हो जो ना होकर भी मौजूद हो!!!

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