पा-ए-उम्मीद पे रक्खे हुए सर हैं हम लोग
हैं ना होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग
जितनी जल्दी हो बस अब हम से किनारा कर ले
तू सफ़ीना हैं मेरी जान भंवर है हम लोग
हमपे इतना भी यक़ीं ठीक नहीं जान-ए-बहार
उड़ती उड़ती सी फ़क़त एक ख़बर हैं हम लोग
हम में घर ढूंढने वाले तुझे मालूम नहीं
एक मुद्दत से ना दीवार ना दर हैं हम लोग
देखने का ये हुनर आया है आते आते
जाते-जाते जो बची है वो नज़र हैं हम लोग
तूने बरता ही नहीं ठीक से हमको ए दोस्त
ऐब लगते हैं ब-ज़ाहिर प हुनर हैं हम लोग
अभिषेक शुक्ला
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Anand Palodara
(Anand_07)
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Joined 26 July 2018
7 DEC 2021 AT 22:36
8 NOV 2021 AT 14:17
मेरा साँस उखड़ते ही सब बैन करेंगे रोएँगे
या'नी मेरे बा'द भी या'नी साँस लिए जाते होंगे
Jaun Eliya-
19 OCT 2020 AT 23:12
मैं जब रोने से उब जाता हूं
ख़ूब हंसता हूं ख़ूब गाता हूं
- शाहबाज़ रिज़वी-
11 SEP 2018 AT 19:50
When you stop criticising your government and manifest its every rubbish thing , then sorry your ruler is a Despot and is fooling you with his art.
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