Amit Mishra   (✍️Amit ('मौन'))
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Joined 5 November 2017


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Amit Mishra 16 JAN AT 21:45

सपने वो हैं जो बंद आँखों से देखे गए हों, खुली आँखें सिर्फ़ भ्रम पैदा करती हैं।

(कैप्शन में पूरा पढ़ें)

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Amit Mishra 9 JAN AT 19:38

बाढ़ और सूखे की लड़ाई में
मृत्यु हमेशा इंसानों की होती है।

(In caption)

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Amit Mishra 6 JAN AT 19:34

हिंद नाम के सूरज को, इस तरह नही ढलने देंगे
हम हृदय प्रेम से भर देंगे, अब द्वेष नही पलने देंगे

ये चिंगारी जो भड़की है, ना दिल में घर करने पाए
सींचा है खून से धरती को, बस्ती को ना जलने देंगे

सूनी गोदें ना होंगी अब, सिंदूर ना पोछा जाएगा
हम जाति-धर्म की बातों पर, बेटों को ना लड़ने देंगे

हो ख़ुशियों से खलिहान भरे, हर दिल मे भाई-चारा हो
अब नफ़रत की बंदूकों में, बारूद नही भरने देंगे

जब दीवाली में दीप जले, हर हिंदुस्तानी गले मिले
भारत माता की आँखों से, अब आँसू ना बहने देंगे

हम हृदय प्रेम से भर देंगे, अब द्वेष नही पलने देंगे

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Amit Mishra 4 JAN AT 19:43

आख़िरी बार गले लगते हुए तुम्हारी आँखों से गिरे मोती अब मेरे कंधे पर तिल बनकर उग आए हैं। जिनका बोझ उठाना मेरे कमज़ोर कंधों के लिए बड़ा मुश्किल हो गया है।

मैं झुक कर चलने लगा हूँ, लगता है जैसे असमय ही बूढ़ा हो चला हूँ।

मेरी ज़िद और ज़िंदगी के चुनाव में उस समय मैंने अपना हठ चुना था।

काश मैंने तुम्हे चुना होता तो आज तुम मेरा सहारा होती।

एक बोझ मेरे दिल पर भी है।

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Amit Mishra 30 DEC 2019 AT 18:33

प्रकृति के बनाए नियमों के विपरीत जाकर कविता अपने जन्म के लिए किसी परिस्थिति, परिवेश, प्रजनन या प्रक्रिया का इंतज़ार नही करती।

मेरे द्वारा इस पंक्ति के लिखे जाने और आपके द्वारा इसे पढ़े जाने तक कितनी ही नई कविताएं जन्म ले चुकी होंगी।

एक दिन जब सभी इंसान एक दूसरे से लड़ते हुए मर जाएंगे उस दिन भी ये कविताएं जीवित रहेंगी और अपने अंदर बचाए रखेंगी हम इंसानों के अस्तित्व को।

हर कविता अपने लिखने वाले का नाम उसकी मृत्यु के पश्चात भी जीवित रखती है और इस तरह ये अपने रचयिता को उसे जन्म देने का मूल्य चुका देती है।

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कविता..
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#amit #yqbaba #yqdidi #amitmaun

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Amit Mishra 11 DEC 2019 AT 22:21

पहले प्रेम की स्मृतियाँ भी
पुरानी चोट की तरह ही होती हैं।
जैसे पुरानी चोट का दर्द
बदलता मौसम देखते ही
बाहर आ जाता है
और मजबूर करता है
कराहने के लिए

ठीक वैसे ही
आस पास होने वाली कुछ घटनाएँ
यादों की बोरी को उल्टा कर के
उसके अंदर से कुछ पल निकालती हैं
और मजबूर करती हैं
या तो होंठों को बेवज़ह मुस्कुराने के लिए
या फ़िर आँखों से कुछ बूंदों का वज़न
कम करने के लिए।

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Amit Mishra 5 DEC 2019 AT 19:13

प्यार में पागलपन ना अच्छा,
साथ निखरना होता है
थाम लिया जो हाथ किसी का,
साथ ही रहना होता है।।

(Read In caption)

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Amit Mishra 4 DEC 2019 AT 13:13

|| हिस्से ||

Read in caption

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Amit Mishra 28 NOV 2019 AT 10:31

दिल है बंजर सूनी बस्ती,
कौन यहाँ अब आएगा
बादल भी जिस घर से रूठे,
बारिश कौन बुलाएगा

(In caption)

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Amit Mishra 25 NOV 2019 AT 11:53

◆स्वप्न या हक़ीक़त◆

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