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AMIT GANGWAR (अमित...)

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AMIT GANGWAR 12 HOURS AGO

उसके टिकटॉक पर मुजरे, गहरी लिपस्टिक
और बुलबुले सा ज्ञान
लो तैयार हो गया मेरे नफरत का सामान....

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AMIT GANGWAR 18 JAN AT 18:42

छोड़ो तमन्ना साँसों में उतर जाने की
करवटें बदलना हमारी आदत रही है

छोड़ो माला जपना हमारे नाम की
हर धर्म पूजना हमारी इबादत रही है

वजह जगजाहिर है , मिलना उसी दरख़्त के नीचे,,,

जहाँ आत्मा बेहोश पड़ी पिछले आशिक़ की
और लटकी लाश में फड़फड़ा तुम्हारी चाहत रही है...

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AMIT GANGWAR 16 JAN AT 19:31

सखे! आसमाँ बाधक है मेरी कल्पनाओं का
जकड़ता है, हटो ,, ये पृथ्वी ही दे मारूँ इस पर

वायु , न विपरीत, ना सम्मुख, दाएँ बाएँ चलती है
इंसान हूँ,तनिक डर ,विशाल फूँक प्रहारूँ इस पर

अविरलता नदियों की विलुप्त होती , शनैः शनैः
रोने तक , नौका से निरंतर चप्पू मारूँ इस पर

गन्ना ही गन्ना , अब कहाँ लहलहाती पीली सरसों
सभ्यता पुनर्जन्म हेतु, एक सुनामी गुजारूँ इस पर

स्वार्थी मानव की तपिश से झुलसा मेरा कागज
भरी जेठ दुपहरी का तपता सूरज उतारूँ इस पर

डरी-सहमी कल्पना, मेरी वो उस कोने में बैठी है
हे ! प्रकृति , पुचकार उसे, तन-मन वारूँ इस पर।

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AMIT GANGWAR 14 JAN AT 7:20

hey human,,,
your social regulations suffocate me...

I'll kick this yawned earth in black hole and scoot to moon as poetry is enough to operate my every system...

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AMIT GANGWAR 30 DEC 2018 AT 8:50

नक्काशी... इश्क की यूँही हो गई
आधार... लाजमी था... ढह गया..!!

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AMIT GANGWAR 28 DEC 2018 AT 18:49

उमर हो गई मोहब्बत की , इशारा दिन रात ये ख्याल देते हैं,
मदमस्त दीवाना होना है हमको , तुमको अपना हाल देते हैं,
टूटा हुआ दिल ,,,,, ही ले लूँ क्या जमाने से,
जोड़कर फिर उसमें ... धड़कन अपनी डाल देते हैं!!!

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AMIT GANGWAR 26 DEC 2018 AT 17:43

मोदी जी ,,, अब शौचालय बनवाए होत क्या ,
जब बिटिया मुड़ गई खेत !!!😊😊😊😊

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AMIT GANGWAR 25 DEC 2018 AT 16:02

जीवन तारम्यपूर्ण व्यतीत हुआ , कुछ शेष , विशेष न रहा ,
समस्त दुनिया के दर्शन किए , श्रेष्ठ भारत देश ही रहा,

मृत्यु से पहले , बराबर जायदाद बेटों को निष्पक्ष बाँट दी,
बहुएँ जब जब उछलीं, तब-तब प्यारी सी डाँट दी,

धर्मपत्नी , पतिव्रता को आलिंगन कर माथे से पुचकारा,
छोड़ चला मैं , इन बच्चों का अब तुम ही सहारा,

पुत्तन श्मशान में उत्तम स्थान देख आया ,
पधारने वाले पधार गए , अब ना करो वक्त जाया,

पोता दौड़ा... मेले दादा तो तहाँ ले दा लहे हो,
मेरी आत्मा तड़पी, उसे घर में क्यों छोडे़ आ रहे हो,

उठाया काँधे पर , सत्य फिर राम नाम हुआ,
जिंदगी पटरी से उतरी, शमशान में विराम हुआ,

विधिवत क्रिया कर्म हुए , अश्रु धाराएँ बहती रहीं,
चिता धधक उठी , मंद पुरवाई बहती रही,

मेरी यादगार शख्सियत का ,,, पंचतत्व में मिलन हुआ,
अंततः ... जनाजा प्रसन्नतापूर्वक संपन्न हुआ!!!

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AMIT GANGWAR 23 DEC 2018 AT 9:53

ऐसे कैसे जाएँगे वो, अब भोंपो की बारी थी,
संपूर्ण गाँव गूँज उठा , गली-गली दुखियारी थी,

बेटे बराबर रोये, बहुओं ने राजनीति खेली ,
सँझली निशब्द रही , छोटी सिसकी नई नवेली,

बड़ी बहू तनिक कम रोई , मँझली ने सीमाएँ तोड़ी,
काल भुजंगिनी सी अर्धांगिनी ने छाती पर चूड़ियाँ तोड़ीं,

कौए ने चोंच की धार तेज , बारम्बार आकर की ,
बड़े देखें एकटक उसको , हास पोते ने जाकर की,

तहस-नहसता चरम सीमा पर , छतों से लोग झाँकने लगे ,
बेटा उधर मत जाना, अपने बच्चों को डांटने लगे,

चंदे से कन्डा - लकड़ी का इंतजाम हुआ,
गांव के चौराहों पर , यादों का गुणगान हुआ,

कितना नाटक है ... देख यमराज भी सन्न हुआ ,
खैर ... जनाजा प्रसन्नता पूर्वक संपन्न हुआ।।।

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AMIT GANGWAR 21 DEC 2018 AT 19:08

खैर,,, जनाजा प्रसन्नता पूर्वक संपन्न हुआ,
आजीवन कलेह पसरा रहा, मृत्यु पश्चात प्रसन्न हुआ,
खैर ,,, जनाजा प्रसन्नता पूर्वक संपन्न हुआ,

नए-नए अपनों की प्रतीक्षा , संरक्षण में शव,
गांव में हो कानाफूसी, फलाने फुकेंगे कब,

रामलाल , सीता राम ,मोहन ,रामकली और लीलावती,
रामभरोसे, बुधिया ,वेदपाल , दीनानाथ और जामवती,

बचपन के यारों ने भी जर्जर शरीर से उपस्थिति दी ,
मेरे क्षणभंगुर शरीर को नकार कर , आत्मा को एक हस्ती दी,

भेट कफनों की ढेरों , कंधे आठ तैयार हुए,
संकुचित ऐंठे सज्जन भी रो कर तार-तार हुए,

परिवारी का अंतर-मन प्रसन्न , अमित किसी काम आया,
सदियों से समाप्त, रिश्तेदारी को पुनः बढ़ाया,

आत्मा भ्रमण करे खुशी-खुशी, सब राग-द्वेष नगण्य हुआ,
खैर ,,, जनाजा प्रसन्नता पूर्वक संपन्न हुआ ।।।

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