Ambikesh Kumar Chanchal   (अम्बिकेश कुमार 'चंचल')
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Joined 29 December 2017


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यादों के असमंजस में सहमा बैठा हूं
ये तुम हो या वो तुम थे ।

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कुंडियां क्यों चढ़ा रहे, कौन सा ठहर जाएगा
वक़्त ही तो है, गुजर जाएगा ।

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14 AUG AT 21:26

चेतन, अच्युत, सुधीर, सुमेरू जय राम का
बाल वृद्ध अवध बिहारी स्वागत जय राम का ।
सांस भरों तो कल्प जिये, सुर मुनि हर्षित होए
नाग, नारद, ब्रह्मा, शिव समेत स्तुति करे जय राम का ।
अखंड चराचर योग - मोह जेहि भांति पुलकित होए
पुत्र, पिता, मित्र, अरू माता स्नेह जतावे जय राम का ।
दशरथ नंदन शेष ज्येष्ठ आद्योपान्त शिव सुमिरन
हे शक्ति योग! हे भक्ति योग! स्वागत प्रभु जय राम का ।

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तुझे पाकर मैं मुकम्मल हो जाऊं
मगर मज़ा गम का विसर जाएगा ।

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मुझे देखकर मुस्कुराने वाले बताकर जा
इश्क़ है, तंज है, या तमाशा जताकर जा ।

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31 JUL AT 10:48

अंदाज़ - ए - तग़ाफ़ुल लख्त- ए- जिगर का क्या कहें
वो ना कहते हैं, अंदाज़ जश्न - ए - उर्स होता है ।

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27 JUL AT 10:01

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बेदर्द, बे-मुरव्वत, बे-हया मुफलिसी
कोई मेहमाँ यूं ठहरता है, मुफलिसी ?

अपना ना सही, ख्याल तो मेरा कर
घर में जवां बेटी रहती है, मुफलिसी ।

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